नवरात्र के चौथे दिन करें मां कुष्मांडा की पूजा

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कोलकाता डेस्कः आज नवरात्र का चौथा दिन है और नवरात्र के चौथे दिन मां देवी के नौ रूपों में से चौथे रूप मां कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा मां कुष्मांडा ने अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था। कुष्मांडा शब्द दो शब्दों यानि कुसुम मतलब फूलों के समान हंसी का अर्थ है ब्रह्मांड। पूरे ब्रह्मांड को अपने गर्भ में उत्पन्न किया है।

साथ ही हाथ में अमृत कलश भी है। माना जाता है जो भक्त मां के इस रूप की आराधना करते हैं, उनपर कभी किसी प्रकार का कष्ट नहीं आता। कुष्मांडा देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है। इनकी आठ भुजाएं हैं। मां की सवारी सिंह है जो कि धर्म का प्रतीक है। मां के शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान है।

देवी मां के इस दिन का रंग हरा है। हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां कुष्मांडा की पूजा करने से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। सच्चे मन से मां की आराधना करने से भक्तों को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है। मां कुष्माण्डा आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। ऐसे में कहा जाता है कि मां की आराधना में भक्तों को हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

पूजा की विधिः नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त हो जायें। इसके बाद मां कूष्मांडा का स्मरण करके उनको धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें। फिर ओम कूष्मांडा दैव्यै: नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। अब मां कुष्मांडा को हलवा और दही का भोग लगाएं। फिर उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां कूष्मांडा की आरती करें।

मां कुष्माण्डा मंत्रः या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

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