अफगानिस्तान में पहली बार महिलाओं को मिल रही है आजादी

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काबुलः अफगानिस्तान एक ऐसा देश है, जो अपनी रूढ़िवादिता के लिये जाना जाता है। ये एक ऐसा देश है, जहां रूढ़िवादी और पुरूष प्रभुत्व की आड़ में होने महिलाओं के साथ घरेलू उत्पीड़न होता था। जहां महिलाओं को घर से बाहर निकलने तक की इजाजत नहीं थी। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान 1996 से 2006 तक महिलाओं का घरों से बाहर निकलना बैन था।

हालांकि परिवार के किसी पुरुष सदस्य के साथ उन्हें बाहर निकलने की इजाजत थी। शिक्षा और स्प़ॉर्ट्स भी महिलाओं की पहुंच से दूर था लेकिन अब इस देश की महिलाएं खुली फिजां में स्वतंत्र होकर सांस ले रही हैं। बदलाव की हवाएं बहने लगी है। लड़कियां बिना किसी पाबंदी के स्कूल आने-जाने लगी हैं, महिलाएं किक्रेट जैसे खेल खुलेआम खेलती दिखाई पड़ती हैं।

कुछ वर्षों पहले तक वहां ऐसा करना मात्र सपने जैसा था। पिछले दो आम चुनावों में कई महिलाएं प्रतिनिधि बनकर संसद में पहुंची हैं। इन दिनों देश में पहला फिटनेस सेंटर खोला गया है। कंधार में खोला गया ये फिटनेस सेंटर सिर्फ महिलाओं के लिए है। हर दिन यहां करीब 50 महिलाएं व्यायाम करने के लिए आती हैं।

रूढ़िवादी अफगानिस्तान में इस तरह का दृश्य इससे पहले नहीं देखा गया है। जहां महिलाएं आकर खुद को स्वस्थ रखने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकें। इस संबंध में बात करते हुए फिटनेस सेंटर में आनेवाली कई महिलाओं ने मीडिया के समक्ष अपने अनुभवों के बारें में खुलकर बात की।

फातिमा हाशमी नाम की महिला ने कहा, इसमें कोई शक नहीं है कि यहां आना बिना खौफ के नहीं है। हर कोई जानता है कि ऐसी हालत में महिलाएं ज्यादा भयभीत रहती हैं। लेकिन दूसरे नजरिए से देखा जाए तो व्यायाम हमारे स्वास्थ्य के लिए मुफीद और खुशी देनेवाला है। इसलिए हम अपने उद्देश्य पर ज्यादा ध्यान देते हैं और खौफ को नजरअंदाज करते हैं।

वहीं इंस्ट्रक्टर सना जान ने कहा, उनके लिए जिम आर्थिक स्वावलंबन और सुरक्षा का जरिया है। उन्होंने कहा, मैं यहां काम कर बहुत खुश हूं। मैं अन्य महिलाओं के अलावा खुद की भी मदद कर सकती हूं। यहां की कमाई मेरे परिवार के लिए बड़ी आर्थिक मदद है। मल्लिका सुरैया जिम की संस्थापक मरयम दुर्रानी ने बताया कि महिलाओं की प्रतिक्रिया सकारात्मक थी जबकि पुरुषों को थोड़ा संदेह था।

इस तरह से अफागानिस्तान जैसे मुल्क में महिलाओं के फिटनेट सेंटर खुलना एक बड़ी बात हैं। अब इस मुल्क़ में महिलाओं को पुरूषों के समान अधिकार प्राप्त हो रहे हैं, जो महिला सशक्तिकरण की मिशाल पेश कर रहा है।

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