फिर से ममता सरकार बनना लगभग तय, क्यों नहीं चल पाया भगवा रंग का जादू

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फाइल फोटोः पीएम मोदी, ममता बनर्जी

कोलकाता: अब तक के सामने आये रुझानों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस लगातार बढ़त बनाती जा रही है। साफ होता दिख रहा है कि एक बार फिर से बंगाल में दीदी की ही सरकार बनने वाली है। बीजेपी ने इस बार दावा किया था कि वो बंगाल में 200 सीटों से अधिक पर जीत दर्ज करेंगे लेकिन चुनावी नतीजे कुछ और ही बता रहे हैं।

बीजेपी 100 सीटों के अंदर ही सिमटती दिखाई दे रही है। जबकि तृणमूल कांग्रेस ने डबल सेंचुअरी मार ली है। नंदीग्राम की सीट से खड़ी हुई ममता बनर्जी भले ही बीजेपी के शुभेन्दु अधिकारी से 8858 वोटों से पीछे चल रही हों, लेकिन बीजेपी के बाबुल सुप्रियो, लॉकेट बनर्जी और स्वप्न दासगुप्ता जैसे बीजेपी के दिग्गज नेता पिछड़ते नजर आ रहे हैं।

पूरे देश की नजर इस वक्त पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है। बीजेपी ने बंगाल में चुनावी रैलियों में अपनी ताकत झोंक दी थी। खुद पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, स्मृति ईरानी, योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसे एक से बढ़कर एक दिग्गजों ने बंगाल में जमकर प्रचार किया।

इनकी रैलियों में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ भी जुटी। ऐसा लग रहा था कि मानों पूरे बंगाल में जय श्री राम के नारे गूंज रहे थे लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। चुनावी रुझान दीदी की ओर बढ़त बता रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह मानी जा सकती है कि है बीजेपी की ओर से बंगाल में सीएम पद के लिये किसी चेहरे को उतारा नहीं गया था।

भले ही पीएम नरेन्द्र मोदी बंगाल में लोगों के पंसदीदा हैं लेकिन वो जानते थे कि पीएम मोदी तो बंगाल के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। ऐसे में लोगों को यही लगा कि बंगाल में ममता दीदी के मुकाबले बीजेपी के पास कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं है, जो यहां का अगला मुख्यमंत्री बने।

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