गजन त्योहार में मुर्दों लेकर नृत्य करते हैं श्रद्धालु !

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संतोष शर्मा,बर्दवान: क्या आपने कभी किसी को सड़े-गले हुए मुर्दों और इनके विभिन्न अंगों को लेकर नृत्य करते, धार्मिक जुलूस निकालते हुए देखा है? यदि नहीं, तो आइये एक ऐसे त्योहार के बारे बताता हूं जिसमें मुर्दों को लेकर श्रद्धालुओं द्धारा अजीबो-गरीब ढंस से नृत्य करते हुए धार्मिक जुलूस निकाने जाने की प्रथा है। इस त्योहार का नाम है गजन या गजोन।


यह त्योहार पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में सौ साल से भी ज्यादा समय से मनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के विशेष रूप से बर्दवान जिले के कुरमुन, पारुल, पलाशी, कुशपुर, अराची जैसे गांवों में गजन त्योहार बांगाली कैलेंडर के साल का अंतिम महीना चैत्र में श्रद्धा-भक्ती और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

इस त्योहार में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले लोगों को गजन श्रद्धालु कहा जाता है। ये श्रद्धालु अपने हाथों में सड़े-गले, बदबूदार मुर्दों और उनके विभिन्न हिस्सों को लेकर शोर मचाते, नृत्य करते हुए धार्मिक जुलूस निकालते हैं। किसी गांव में निकाले गये इस जुलूस को देखने के लिए बच्चे, महिला, बुजुर्ग तक भी अपने घरों से बाहर निकल आते हैं।

किन्तु सबसे आश्चर्य की बात यह है कि मुर्दों को लेकर नृत्य, धर्मिक जुलूस करने की इस कु-प्रथा को बंद करने के लिए पुलिस व प्रशासन ना जाने किस कारण चुप्पी साधे रखती है। हालांकि पुलिस व प्रशासन की ओर से यह आश्वासन दिया जाता है कि उन्हें यदि किसी ने मुर्दों को लेकर नृत्य, जुलूस आदि करने से संबंधित कोई भी शिकायत मिलती है तो उस पर जरूर कार्रवाई की जाएगी।
किन्तु बुद्धिजीवी वर्ग का आरोप है कि धार्मिक प्रथा के नाम पर मुर्दों  को लेकर नृत्य करने वाले गजन श्रद्धालुओं के खिलाफ पुलिस कानूनी कार्रवाई करने से कतराती है। ऐसी कु-प्रथा को शीघ्र बंद कर देना चाहिए। इधर, गजन श्रद्धालुओं ने बताया कि गजन त्योहार वर्षों पुराना है। इस त्योहार में एक परंपरा के मुताबिक गजन श्रद्धालुओं को मुर्दों को लेकर नृत्य करने की प्रथा है।
वास्तव में धर्म, आस्था, धार्मिक त्योहार, रीति-रिवाज, प्रथा आदि के नाम पर आज भी हमारे समाज में ऐसी अनेक कु-प्रथाएं कायम हैं, जिनके नाम पर लोग कानून की धज्जियाँ उढ़ाने से बाज नहीं आते हैं। जबकि धर्म या आस्था को ठेंस नहीं पहुंचाने का बहाना बनाकर पुलिस व प्रशासन मुर्दों को लेकर नृत्य करने जैसी कु-प्रथा को बंद करने में ठोस कदम नहीं उठाती है। नतीजा, गजन त्योहार में श्रद्धालुओं द्वारा मुर्दों और उनके विभिन्न हिस्सों को लेकर नृत्य और धामिर्क जुलूस निकालने जाने की प्रथा आज भी चली आर रही है।

गजन त्योहार : पश्चिम बंगाल में गजन त्योहार हिन्दुओं का एक लोक त्योहार है। यह शिव, नील व धर्मगुरु का पूजा केंद्रिक त्योहार है। यह त्योहार बंगली कैलेंडर के अंतिम महीना चैत्र में मनाया जाता है। गजोन त्यहार में श्रद्धालु अपने हाथों में सड़े-लगे हुए मुर्दों और उनके विभिन्न हिस्सों को लेकर जोर-जोर से गर्जन और नृत्य करते हैं। साथ ही गजोन श्रद्धालुओं का जुलूस भी निकाला जाता है। श्रद्धालुओं के इस गर्जन के आधार पर इस त्योहार का नाम गजन पर्व रखा गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गजन त्योहार में देवी हरीकाली के साथ शिव को विवाह होता है। इस विवाह में गजन श्रद्धालु बराती के रूप में भाग लेते हैं। दूसरी तरफ, धर्मठाकुर और देवी मुक्ती का विवाह को केंद्र कर भी एक त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार में मेला एक अभिन्न अंग है।

कहाँ से मिलते हैं मुर्द : गजन त्योहार में श्रद्धालुओं को मुर्दों के साथ नृत्य करते हुए देखा जाता है। किन्तु प्रश्न है, इन मुर्दों को कहाँ से लाये जाते हैं? एक श्रद्धालु ने बताया कि वे इन शव या मुर्दों को विभिन्न कब्रिस्थानों से इकट्ठे करते हैं। धार्मिक रीति के मुताबिक किसी कारण जिन मुर्दों या शवों को जलाया नहीं जाता है, उन्हें दफन कर दिया जाता है। जबिक ऐसी भी रीति है कि जहाँ मृत बच्चों के शवों को जलाने के बजाय उसे दफन कर दिया जाता है। गजन श्रद्धालु ऐसे दफन शवों को कब्र से निकाल लेते हैं। इकट्ठे किये गये शवों या मुर्दों को फूल-माला के साथ रस्सी से बांधकर किसी पेर की डाली में टांग दिया जाता है। उसके बाद फूल-माले से सजा हुए दुर्गंधपूर्ण मुर्दों को अपने हाथों में लेकर शोर मचाते, नृत्य करते हुए श्रद्धालु गांव में जुलूस निकालते हैं। सड़े-गले इन मुर्दों का जुलूस जहां से भी गुजरता है, वहां उसे देखने के लिए हर उम्र के लिए लोग इकट्ठे होते हैं।

युक्तिवादी समिति का मुहिम : समाज में फैली कु-प्रथा, रीति-रिवाज आदि के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन करने वाली संस्थ भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिति (साइंस एंड रेशनालिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) और ह्यूमैनिस्ट्स एसोसिएशन की ओर से गजन त्योहार में मुर्दों को लेकर श्रद्धालुओं के नृत्य, जुलूस निकाले जाने का विरोध जताया गया है।

युक्तिवादी समिति के अध्यक्ष प्रबीर घोष ने कहा कि धर्म, आस्थाा आदि के नाम पर आज भी हमारे समाज में अनेक कु-प्रथाएं फैली हुई हैं। गजन उत्सव में श्रद्धालुओं द्वारा मुर्दों को लेकर नृत्य-जुलूस करना भी एक कु-प्रथा ही है। इस प्रथा को बंद करना जरूरी है। घोष ने कहा कि अंधविश्वास हमारे मस्तिष्क पर खतरानाक मोनवैज्ञानिक असर डालता है। विशेष रूप से कमजोर और बच्चों के दिमान पर ऐसी कु-प्रथाओं का भयानक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म, आस्था को ठेस नहीं पहुंचाने का बहाना बनाकर पुलिस व प्रशासन गजन उत्सव में श्रद्धालुओं द्वारा मुर्दों को लेकर नृत्य-जुलूस करने को बंद नहीं किया है। नतीजा, ऐसी धार्मिक प्रथा आज भी कायम है। जबकि मुर्दों को लेकर नृत्य, जुलूस निकालना ‘ पब्लिक न्यूसेंस एक्ट’ के तहत अपराध है।


प्रबीर ने कहा कि मुर्दों को लेकर जुलूस निकालने वाले गजन श्रद्धालुओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किये जाने की मांग को लेकर युक्तिवादी समिति की ओर से पुलिस व प्रशासन से अपील भी की गयी है। इसके लिए समिति के बर्दवान जिला सचिव संजय कर्मकार और अनाबिल सेनगुप्ता ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा है। उस ज्ञापन में प्रशासन से मुर्दों के साथ नृत्य, जुलूस निकालने जाने वाली प्रथा बंद करने की मांग की गयी है।
संजय ने कहा कि समिति की ओर से इस प्रथा के बारे में जागरूकता कार्यक्रम भी किया गया। जिसके बाद से लोग अब गजन त्योहार में मुर्दों को लेकर नृत्य आदि करने के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।

मुर्दों को लेकर जुलूस निकालने पर गिरफ्तारी : गजन त्योहार में मुर्दों को लेकर जुलूस निकालने के आरोप में बर्दवान थाने के अधीन शक्तिगढ़ फांड़ी की पुलिस ने 8 श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया। बर्दवान थानांतर्गत बेचाराट इलाके में इन श्रद्धालुओं ने श्मशान से बच्चों का शव और खोपड़ी इकट्ठे किये थे। गिरफ्तार सभी श्रद्धालु बर्दवान थानांतर्गत सोना पलाशी गांव के रहने वाले हैं। पुलिस ने शव और खोपड़ो को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बर्दवान मेडिकल अस्पताल में भेज दिया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार गजोन त्योहार के उपलक्ष पर बर्दवान के कुड़मून, सोना पलाशी, पारुई, कुबराजपुर समेत आसपास के कई गांवों से मुर्दों को लेकर श्रद्धालु नृत्य करते हुए जुलूस निकालते हैं। इसके लिए ये श्रद्धालु बेचारहाट श्मशआन से एक बच्चे का शव को निकालकर एक मोटर वैन से सोना पलाशी गांव के लिए जा रहे थे। रास्ते में शक्तिगढ़ बाजारा इलाके में इन श्रद्धालुओं को देखऱ स्थानीय निवासियों को संदेह हुआ। निवासियों ने उस वैन को रोक कर तलाशी ली। लताशी में एक बच्चे का शव और खोपड़ी बरामद हुई। इसके बाद ही उस मोटर वैन को रोकर कर लोगों ने इसकी खबर शक्तिगढ़ पुलिस चौकी को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव, खोपड़ी जब्त कर लिया। साथ ही शव और खोपड़ी ले जाने के आरोप में 8 श्रद्धालुओं को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार श्रद्धालुओं को बर्दवान सीजीएम अदालत में पेश किया गया।