केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्मी विलास बैंक के मर्जर को दी मंजूरी

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File photo

नई दिल्ली: केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को लक्ष्मी विलास बैंक डेवलपमेंट बैंक इंडिया लिमिटेड के साथ मर्जर की मंजूरी दे दी है। बुधवार को इस संबंध में बैठक की गई थी। बैठक संपन्न होने के बाद केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने बताया की केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संकटग्रस्त लक्ष्मी विलास बैंक के डेवलपमेंट बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) में विलय के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

इसके साथ ही एटीसी में एफडीआई को भी मंजूरी दी गई। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक के डेवलपमेंट बैंक इंडिया लिमिटेड में विलय के आदेश दिए हैं। इससे 20.5 लाख जमाकर्ताओं को राहत मिलेगी। साथ ही 4000 कर्मचारियों की नौकरी भी बरकरार रहेगी।

साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार ने आरबीआई को कहा है कि कुप्रबंधन करके जो बैंक को डूबने के कगार पर लाते हैं, ऐसे दोषियों को सजा होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसी के तहत नेशनल इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) की स्थापना की गई। कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि इसमें छह हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

निवेश की यह प्रक्रिया दो साल में पूरी की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए बॉन्ड मार्केट के द्वारा एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जुटाई जाएगी। बता दें लक्ष्मी विलास बैंक को सरकार ने मोरेटोरियम में डालते हुए 25 हजार रुपये की निकासी तय करने समेत उस पर 16 दिसंबर तक के लिए कई तरह की पाबंदिया लगा दी थी।

रिजर्व बैंक ने लगातार वित्तीय गिरावट को देखते हुए लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था। बैंक के बढ़ते एनपीए और इसे चलाने में आ रही कठिनाइयों के बीच केन्द्र सरकार ने सिंगापुर की सबसे बड़े ऋणदाता डीबीएस बैंक के लोकल यूनिट डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) के साथ विलय करने को कहा था।

ऐसा पहली बार है जब किसी भारतीय बैंक को सुरक्षित रखने के लिए उसके विदेश प्रतिद्वंद्वी बैंक को चुना।बेलआउट पैकेज के तहत लक्ष्मी विलास बैंक के डिपोजिटर और बॉन्ड होल्डर्स को उनका पूरा पैसा मिल जाएगा। हालांकि, शेयरधारकों को नुकसान होगा। इससे पहले, डीबीएस बैंक ने कहा था कि प्रस्तावित विलय से इसे अपना कस्टमर बेस और नेटवर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी।

हालांकि विलय योजना का ऐलान करने से पहले आरबीआई ने पैसा निकालने पर एक महीने का प्रतिबंध लगा दिया था। जिस पर अब पाबंदी खत्म कर दी गई हैं। यानी, ग्राहक अब बैंक में जमा 25 हजार रुपये ज्यादा अपना पैसा निकाल सकते हैं।

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