शालिग्राम संग तुलसी लेंगी सात फेरे

0
527

कोलकाता डेस्कः कार्तिक एकादशी के दिन तुलसी विवाह करने की परंपरा है। इस साल 26 नवंबर को तुलसी जी का विवाह होगा। तुलसी विवाह के दिन विधिवत तरीके से तुलसी जी और भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम का विवाह संपन्न कराया जाता है। तुलसी विवाह के साथ ही रुके हुए शुभ कार्य एक बार फिर से आरंभ हो जायेंगे। यह भी माना जाता है कि तुलसी विवाह करने से कन्यादान करने के बराबर पुण्यफल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं तुलसी विवाह की तारीख, और मुहूर्त-

एकादशी तिथि प्रारंभ – 25 नवंबर, सुबह 2:42 बजे से, एकादशी तिथि समाप्त – 26 नवंबर, सुबह 5:10 बजे तक, द्वादशी तिथि प्रारंभ – 26 नवंबर, सुबह 05 बजकर 10 मिनट से, द्वादशी तिथि समाप्त – 27 नवंबर, सुबह 07 बजकर 46 मिनट तक है।

पूजन विधि- तुलसी के पौधे के चारो ओर मंडप बनायें और तुलसी के पौधे पर लाल चुनरी चढ़ाएं। इसके बाद तुलसी के पौधे को श्रृंगार की चीजें अर्पित करें। भगवान गणेश और भगवान शालिग्राम की पूजा करें। भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा करायें।

आरती के बाद विवाह में गाये जाने वाले मंगलगीत के साथ विवाहोत्सव पूर्ण किया जाता है। हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तुलसी ने गुस्से में भगवान विष्णु को श्राप से पत्थर बना दिया था। तुसली के इस श्राप से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु ने शालिग्राम का अवतार लिया और तुलसी से विवाह किया। तुलसी मैया को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है।

अगर आप भगवान शालिग्राम और मां तुलसी का विवाह पूरे विधि-विधान के साथ करवाते हैं तो पाप, दुख और रोगों से मुक्ति मिल जाती है। वृंदा के शरीर की भस्म से तुलसी का पौधा बना- वृंदा की शरीर के राख से एक पौधा निकला जिसे भगवान विष्णु ने तुलसी नाम दिया और खुद के एक रूप को पत्थर में समाहित करते हुए कहा कि आज से तुलसी के बिना मैं कोई भी प्रसाद स्वीकार नहीं करूंगा।

इस पत्थर को शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा। तभी से कार्तिक महीने में तुलसी जी का भगवान शालिग्राम के साथ विवाह भी किया जाता है।

विज्ञापन