भगत सिंह जंयतीः पीएम मोदी और अमित शाह ने दी श्रद्धाजंलि

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नई दिल्लीः अपनी सोच और मजबूत इरादों से अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाला नौजवान जो मरकर भी अमर हो गया। ऐसे ही शख्स थे शहीदे ए आजम भगत सिंह। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर सन् 1907 में हुआ और 23 मार्च सन्1931 को भारत मां का यह सपूत देश के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गया।

इस नौजवान क्रांतिकारी को आज पूरा देश याद कर रहा है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर सोमवार सुबह ही भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि मां भारती के वीर सपूत अमर शहीद भगत सिंह की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। वीरता और पराक्रम की उनकी गाथा देशवासियों को युगों-युगों तक प्रेरित करती रहेगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने ट्वीट में लिखा कि अपने परिवर्तनकारी विचारों व अद्वितीय त्याग से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देने वाले और देश के युवाओं में स्वाधीनता के संकल्प को जागृत करने वाले शहीद भगत सिंह जी के चरणों में कोटि-कोटि वंदन। भगत सिंह जी युगों-युगों तक हम सभी देशवासियों के प्रेरणा के अक्षुण स्त्रोत रहेंगे।

बता दें भगत सिंह की जयंती के मौके पर उन्हें पीएम मोदी औऱ अमित शाह के अलावा देश के कई बड़े राजनेताओं ने याद करते हुए अपने अंदाज में श्रद्धाजंलि प्रदान की है। कल पीएम मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के 69वे भाग में भगत सिंह को याद करते हुए कहा था, मन मैं आपको अतीत के एक हिस्से में ले जाना चाहता हूं। एक-सौ-एक साल पुरानी बात है। 1919 का साल था। अंग्रेजी हुकूमत ने जलियांवाला बाग में निर्दोष लोगों का कत्लेआम किया था।

इस नरसंहार के बाद एक 12 साल का लड़का उस घटनास्थल पर गया। वह खुशमिजाज और चंचल बालक, लेकिन, उसने जलियांवाला बाग में जो देखा, वह उसकी सोच के परे था। वह स्तब्ध था, यह सोचकर कि कोई भी इतना निर्दयी कैसे हो सकता है। वह मासूम गुस्से की आग में जलने लगा था। उसी जलियांवाला बाग में उसने अंग्रेजी शासन के खिलाफ लड़ने की कसम खाई। क्या आपको पता चला कि मैं किसकी बात कर रहा हूं? हां मैं शहीद वीर भगत सिंह की बात कर रहा हूं।

28 सितंबर को हम शहीद वीर भगत सिंह की जयंती मनाएंगे। मैं समस्त देशवासियों के साथ साहस और वीरता की प्रतिमूर्ति शहीद वीर भगत सिंह को नमन करता हूं। उन्होंने कहा, शहीद भगत सिंह पराक्रमी होने के साथ-साथ विद्वान भी थे, चिंतक थे। अपने जीवन की चिंता किए बगैर भगत सिंह और उनके क्रांतिवीर साथियों ने ऐसे साहसिक कार्यों को अंजाम दिया, जिनका देश की आजादी में बहुत बड़ा योगदान रहा।

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