पुरुषों के हक के लिये इस महिला ने बुलंद की आवाज

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फाइल फोटो

कोलकाताः समाज के हर वर्ग को अपने अधिकार मांगने का पूरा अधिकार है। इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि समाज के हर वर्ग, उम्र, जाति और धर्म की महिलाओं पर बहुत अत्याचार हुए हैं, लेकिन इसका खामियाजा निर्दोंष पुरुषों को भला क्यों भरना पड़ा। इसी अलग विचार के साथ लेखिका और समाजसेविका पद्मिनी दत्ता शर्मा निर्दोंष पुरुषों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ मुहिम चला रही हैं।

इस मुहिम के जरिये पद्मिनी दत्ता घरेलू हिंसा के शिकार पुरुषों की आवाज को मानवाधिकार संगठन से लेकर सरकारी विभागों एवं न्यायालयों तक पहुंचाने में जुटी हुई है। पद्मिनी के इस प्रयासों को देखते हुए ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स (All india human rights) ने अपने पुरुष प्रकोष्ठ की पश्चिम बंगाल प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उन्हें नियुक्त किया है।

पद्मिनी दत्ता शर्मा का कहना है कि उनको यह नयी जिम्मेदारी मिलने से उन्हें पुरुषों के अधिकार के लिए काम करने के और अधिक अवसर मिलेंगे। उनके संगठन में अनुभवी अधिवक्ता हैं जो पुरुषों के लिए कानूनी लड़ाई में मदद करते हैं। भारतीय दंड विधान की धारा 498 A तहत समानांतर पुरुषों के लिए भी कानून होना चाहिए जिसके लिए पद्मिनी आंदोलन चला रही है।

उनका कहना है कि हाल के दिनों में पुरुषों पर उनकी पत्नी, पार्टनर या प्रेमिकाओं द्वारा तरह- तरह से यातनाएं की गई है। कई चालाक महिलाओं ने अपने पति, दोस्त और बॉयफ्रेंड्स से रुपयों, प्रॉपर्टी और अन्य लाभ लेने के लिए 498A का घोर दुरुपयोग किया है। इन सारी महिलाओं ने पुरुषों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए गुंडागर्दी, ब्लैकमेल, झूठ बोलना और मनगढ़ंत सहानुभूति वाली झूठी कहानियां बनायी।

पद्मिनी का कहना है कि महिलाओं द्वारा पुरुषों के खिलाफ कानून के दुरुपयोग के कारण कई युवक शादी नहीं करना चाहते। कम उम्र में लड़का-लड़की आप में मिलते हैं, फिर उनमें प्यार हो जाता है। बाद में विवाद होने पर लड़को पर लड़कियां दुष्कर्म का केस दर्ज करा देती हैं। यदि कानून सभी के लिए बराबर है तो फिर ऐसे मामलों में युवक ही जिम्मेदार क्यों? पुलिस को पुरुष और महिला दोनों के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज करना चाहिये।

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