30 सालों के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी हालत हुई खराब

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फाइल फोटो

श्रीनगरः 30 सालों के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब जम्मू-कश्मीर में 30 सालों के बाद आतंकवादियों का आक्रमण कम हुआ है। अब आतंकवादियों का सिस्टम अब कमजोर होता जा रहा है। इसका पूरा श्रेय मोदी सरकार को जाता है। कहा जा रहा है कि अब नये आतंकवादियों की भर्ती बहुत कम होती जा रही है। पिछले कुछ महीनों से लगातार आतंकियों का सफाया जारी है।

इस पर कोई संदेह नहीं कि मोदी सरकार के नेतृत्व में गृह मंत्रालय की सफल नीतियों और योजनाओं के कारण आज कश्मीर को आतंक की घाटी नहीं कहा जा रहा है। लेकिन कश्मीर में जो सीधा काम पूरे श्रम और समर्पण के साथ किया है वो किया है हमारे देश के सुरक्षा बलों ने। यहां तैनात सुरक्षा बलों ने पत्थर खाकर भी यहां के नागरिकों को निशाना नहीं बनाया बल्कि आतंकियों को लगभग पूरा साफ़ कर दिया है यहां।

ऐसा पहली बार ही देखा जा रहा है जब कश्‍मीर घाटी में आतंक का समर्थन समझो खत्म होता दिख रहा है और तो और अब यहां बुरहानी वानी जाया कोई दूसरा आतंकी पोस्टर ब्वॉय भी जीवित नहीं बचा है। ना ही केवल सुरक्षा बलों को पाकिस्तान से आतंकी घुसपैठ रोकने में सफलता मिली है, बल्कि उन्होंने घाटी में हथियारों और पैसे की सप्लाई चैन को भी तोड़ने में लगभग पूरी कामयाबी हासिल कर ली है।

घाटी में आतंकवादियों का संगठन नाश करने का सारा श्रेय मोदी सरकार की नीतियों को ही जाता है जिसने इस चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया। अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर प्रदेश प्रशासनिक रूप से पूरी तरह भारत के तौर-तरीकों में घुल-मिल चुका है। कश्मीरी में अब विकास की चर्चा और उसकी गहरी चाहत लोगों की बातों में अक्सर दिखाई देती है। इतनी ही बड़ी कामयाबी यहां ये भी है कि 30 सालों में पहली बार जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का लगभग सफाया हो चुका है।

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