सुर कोकिला लता मंगेशकर हुईं 91 साल की

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फाइल फोटो

मुंबईः अपनी बेहतरीन गायकी से एक लंबे वक्त से लोगों के दिलों पर राज करने वाली सुर कोकिला के नाम से मशहूर पार्श्व गायिका लता मंगेशकर आज अपना 91वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। मधुबाला से लेकर माधुरी दीक्षित और काजोल तक हिंदी सिनेमा के स्क्रीन पर शायद ही ऐसी कोई बड़ी अभिनेत्री रही हो जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज उधार न दी हो।

बीस से अधिक भारतीय भाषाओं में लता ने 30 हजार से अधिक गाने गए, 1991 में ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने माना था कि वे दुनिया भर में सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई गायिका हैं। भजन, गजल, कव्वाली शास्त्रीय संगीत हो या फिर आम फिल्मी गाने लता ने सबको एक जैसी महारत के साथ गाया।

लता मंगेशकर की गायिका के दीवानों की संख्या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में हैं। लता मंगेशकर का जन्म 1929 में मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी और मां शेवनती गुजराती थीं। घर में बचपन से संगीत का माहौल था। उनके पिता मराठी संगीतकार थे। साल 1942 में जब लता 13 साल की थीं, तभी पिता का साया हट गया। पिता के मृत्यु के बाद मास्टर विनायक ने लता के करियर को संभाला। उनके जरिए ही लता को साल 1942 में पहला फ़िल्मी गाना गाने का मौका मिला।

हालांकि, यह गाना फ़िल्म से हटा दिया गया। साल 1942 में एक और मराठी फ़िल्म पहिलि मंगाला गौर में लता को रोल के साथ गाने का मौका मिला। वहीं, हिंदी गाने की बात करें, तो लता मंगेशकर ने एक साल बाद 1943 में फ़िल्म गजाभाऊ में माता एक सपूत की दुनिया बदल दे गाया। साल 1945 में लता मंगेशकर ने मुंबई का रुख़ किया। उन्होंने यहां अपनी एक अलग पहचान बनाई। लगभग सभी फेमस म्यूज़िक डायरेक्टर्स के साथ गाना गाया।

सबके मन में यही सवाल उठता है आखिर लता जी ने आजीवन शादी क्यों नहीं कि तो बता दें पिता के मृत्यु के बाद लता के कंधों पर छोटे भाई-बहनों को संभालने की जिम्मेदारी आ गई। इसलिए उन्होंने आजवीन शादी नहीं की। ये तो हर कोई जानता है कि लता जी क्रिकेट की कितनी बड़ी फैन हैं, सचिन तेंदुलकर उनके पंसदीदा क्रिकेटर हैं। वो कोई भी मैच मिस नहीं होने देती। अगर भारत कोई मैच हार जाए तो उनका मूड ऐसा खराब होता है कि नॉर्मल होने में उन्हें वक्त लग जाता है।

अब लता जी गाने कम ही गाती हैं। इस दौर के संगीत से लता निराश भी दिखती हैं। एक इंटरव्यू में लता जी ने कहा था, गानों का महत्व अब फिल्मों में कम होता जा रहा है। पहले कैबरे होता था और उसके लिए आर्टिस्ट अलग होते थे। हेलन थीं उनके लिए गाने बनते थे। आज हीरोइन ही कैबरे करने लगी है। पहले जैसे गाने अब आते नहीं है। अब तो एक ही टाइप के गाने गाते हैं। अब हीरो हीरोइन सपना देख रहे हैं, ऐस ही गाने आते हैं अब।

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