नवरात्र के पांचवे दिन होती है स्कंदमाता की पूजा

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कोलकाता डेस्कः नवरात्र का आज पांचवा दिन है। हर दिन शक्ति के अलग रूप की पूजा होती है। नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के सभी अवतारों की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और सुख समृद्धि आती है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की जन्म कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर होता हैं वे यदि इस दिन स्कंदमाता की पूजा करते हैं तो बृहस्पति की अशुभता दूर होती है।

वहीं बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। बृहस्पति ग्रह शिक्षा, उच्चपद और मान सम्मान का कारक है। नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्‍कंदमाता को वात्‍सल्‍य की मूर्ति माना जाता है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार देवी स्‍कंदमाता ही हिमालय की पुत्री हैं और इस वजह से इन्‍हें पार्वती कहा जाता है। महादेव की पत्‍नी होने के कारण इन्‍हें माहेश्‍वरी भी कहते हैं।

इनका वर्ण गौर है इसलिए इन्‍हें देवी गौरी के नाम से भी जाना जाता है। मां कमल के पुष्प पर विराजित अभय मुद्रा में होती हैं इसलिए इन्‍हें पद्मासना देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है। भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्‍कंदमाता पड़ा। स्‍कंदमाता प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं की सेनापति बनी थीं। इस वजह से पुराणों में कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है।

स्कन्दमाता माता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनकी गोद में कार्तिकेय बैठे होते हैं इसलिए इनकी पूजा करने से कार्तिकेय की पूजा अपने आप हो जाती है। स्‍कंदमाता की चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से उन्‍होंने स्कंद को गोद में पकड़ा हुआ है। इनकी पूजा करन से वंश आगे बढ़ता है और संतान संबधी सारे दुख दूर हो जाते हैं।

घर-परिवार में हमेशा खुशहाली रहती है। कार्तिकेय की पूजा से मंगल भी मजबूत होता है। मां स्कंदमाता को सुख शांति की देवी माना गया है। इस दिन पीले रंगे के कपड़े पहनकर माता की पूजा करें, इससे शुभ फल की प्रप्ति होती है। उन्हें पीले फूल अर्पित करें। उन्हें मौसमी फल, केले, चने की दाल का भोग लगाए।

ऐसे करें स्कंदमाता की पूजाः नवरात्र के पांचवें दिन सबसे पहले स्‍नान करें और स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। अब घर के मंदिर या पूजा स्‍थान में चौकी पर स्‍कंदमाता की तस्‍वीर या प्रतिमा स्‍थापित करें। गंगाजल से शुद्धिकरण करें। अब एक कलश में पानी लेकर उसमें कुछ सिक्‍के डालें और उसे चौकी पर रखें। अब पूजा का संकल्‍प लें।

इसके बाद स्‍कंदमाता को रोली-कुमकुम लगाएं और नैवेद्य अर्पित करें। अब धूप-दीपक से मां की आरती उतारें। आरती के बाद घर के सभी लोगों को प्रसाद बांटें और आप भी ग्रहण करें। स्‍कंद माता को सफेद रंग पसंद है। आप श्‍वेत कपड़े पहनकर मां को केले का भोग लगाएं। मान्‍यता है कि ऐसा करने से मां निरोगी रहने का आशीर्वाद देती हैं।

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