पहली बार सीमा पर राफेल ने भरी उड़ान

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File Photo

नई दिल्लीः बीते कई महीनों से भारत और चीन के बीच के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं। एलएसी पर तनातनी और युद्ध की आशंका के मद्देनजर भारतीय सेना के हौसले पूरी तरह से बुलंद है। दुश्मन के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर से लेकर लद्दाख तक पूरी तरह तैयार है।

भारतीय सेना चीन से किसी भी हालात में निपटने के लिये पूरी तरह से कमर कस चुकी है। शातिर चीन नये-नये पैंतरे अपनाता रहता है लेकिन अब भारतीय सेना की भी चीन की हर चालबाजी पर पैनी नजर है। इसी का एक नमूना आज लद्दाख में देखने को मिला। भारतीय वायुसेना में शामिल हुए राफेल विमान आज लद्दाख के आसमान में गर्जना के साथ उड़ान भरते दिखाई दिए।

अभी राफेल की तैनाती की गई है, लेकिन इससे पहले मिराज और सुखोई लड़ाकू विमानों की तैनाती हो चुकी है। राफेल विमानों को वायुसेना में शामिल किये जाने को लेकर वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने जानकारी दी है कि राफेल को सही समय पर वायुसेना में शामिल किया जा रहा है। इनके आने से भारतीय वायुसेना की ताकत में वृद्धि होगी। साथ ही उन्होंने बताया कि राफेल विमानों को गोल्डन ऐरोज स्कॉड्रन में शामिल किया जाएगा।

बता दें भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद को लेकर सोमवार को लद्दाख के मोल्डो में कमांडर स्तर की छठी बैठक जारी है। इस बैठक में पहली बार विदेश मंत्रालय से एक संयुक्त सचिव-रैंक वाले अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। इनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि वार्ता का परिणाम सकारात्मक निकले।

इसके अलावा, भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) में भारतीय रक्षा मंत्रालय के एक प्रतिनिधि भी शामिल हुए हैं। अब तक दोनों सेनाओं के कॉर्प्स कमांडर-स्तर के अधिकारी पांच बार मिल चुके हैं, लेकिन लद्दाख सेक्टर में जारी गतिरोध को खत्म करने में नाकाम रहे हैं। इस कारण दोनों पक्षों द्वारा सीमा पर महत्वपूर्ण सैन्य निर्माण किया गया है।

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