भगत सिंह के गांव में धरने पर बैठे पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह

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चंडीगढ़ः बीते दिन ही विपक्ष द्वारा भारी हंगामे के बीच लोकसभा में कृषि बिल विधेयक पास किये गए थे। राष्ट्रपति ने तीनों कृषि विधेयकों को मंजूरी भी दे दी है। लेकिन देश के किसान इन बिलों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन का असर सबसे ज्यादा हरियाणा-पंजाब में देखऩे को मिल रहा है।

सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह शहीद भगत सिंह नगर के खटकर कलां गांव में कृषि बिल के खिलाफ धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता भी उनके साथ धरने पर बैठे हैं। उनके साथ कांग्रेस महासचिव और पंजाब के इनचार्ज हरीश रावत भी धरने में शामिल हैं।

धरना शुरू करने से पहले अमरिंदर सिंह ने भगत सिंह की प्रतिमा के आगे श्रद्धांजलि अर्पित की। पंजाब का इंचार्ज नियुक्त होने के बाद हरीश रावत पहली बार पंजाब दौरे पर आए हैं। इससे पहले वह स्वर्ण मंदिर में माथा टेककर अपने दौरे की शुरुआत करने वाले थे लेकिन ऐसे मौके पर कांग्रेस ने योजना बदल दी।

पंजाब में कृषि कानून को लेकर उग्र विरोध प्रदर्शन को देखते हुए हरीश रावत ने धरने में शामिल होकर दौरा शुरू किया। अमरिंदर सिंह ने कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को संसद में अपनी चिंतायें जाहिर करने का अवसर नहीं दिया गया।

राष्ट्रपति की मंजूरी उन किसानों के लिए झटका है जो केंद्र के इन कानूनों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन खतरनाक कानूनों को मौजूदा स्वरूप में लागू करने से पंजाब का कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जायेगा। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बताया, खटकर कलां में उन्हें (रावत) लाने के पीछे हमारा मकसद किसानों की ऊर्जा को दिशा देना है। वह एक परिपक्व इंसान हैं और केंद्र के खिलाफ किसानों की नाराजगी को रास्ता दिखाकर अब इसका हल ढूंढने पर जोर दिया जा रहा है।

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