बांग्लादेश में अब दुष्कर्म की सजा सीधे मौत

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File Photo

ढाकाः पड़ोसी देश बांग्लादेश में महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने वालों को नहीं बख्शा जायेगा। हाल ही में बांग्लादेश के कैबिनेट ने दुष्कर्म के आरोपियों को अधिकतम सजा के बजाय फांसी देना तय किया है। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हमीद ने उस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिया, जिसके तहत दुष्कर्म मामलों में अधिकतम सजा को उम्रकैद से बदलकर मौत की सजा में तब्दील कर दिया गया।

प्रवक्ता अनवरूल इस्लाम ने कहा कि अभी नियमों में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं, इस बारे में पूरी जानकारी नहीं मिली है लेकिन इस बात पर सरकार सहमत हो गई है कि रेप के मामलों का स्पीड ट्रायल हो। उन्होंने बताया कि वर्तमान कानून में दुष्कर्म के मामलों में अपराधियों को अधिकतम सजा के बतौर उम्रकैद ही मिलती है। वर्तमान कानून में यदि दुष्कर्म पीड़िता मर जाती है तो अपराधियों को मौत की सजा दी जा सकती है।

महिला और बाल उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम में संशोधन की स्वीकृति प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने को दी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। इससे पहले दुष्कर्म के मामलों में अधिकतम सजा उम्रकैद थी। इन दिनों में नोआखली और सयालहट के एमसी कॉलेज में महिलाओं के साथ यौन दुर्व्यवहार और दुष्कर्म के मामलों में ढाका के शाहबाग स्कवॉयर व देश के अन्य भागों में विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किया।

बीते 16 सालों में बांग्लादेश में दुष्कर्म के 4541 मामले सामने आए और इनमें से केवल 60 घटनाओं में ही आरोपी को सजा मिल पाई। बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठन समूह ने कहा कि देश दुष्कर्म की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ रही है। इन महिलाओं की मौत दुष्कर्म के दौरान रेपिस्टों ने हिंसा भी की थी।

संगठन का कहना है कि बहुत सी दुष्कर्म की घटनाएं दबंग लोगों के उत्पीड़न के डर से पुलिस में रिपोर्ट ही नहीं की जाती है। वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश की न्याय व्यवस्था इन मामलों के निपटारे में सालों लगा देती है।

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