अब चीन की नजर अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्लीः लद्दाख की एलएसी की सीमा पर भारत और चीन के बीच पिछले कई महीनों से विवाद जारी है। लद्दाख के रेजांग ला में भारतीय सैनिकों के द्वारा खदेड़े जाने के बाद अब चीन की नजर अरूणाचल प्रदेश की सीमा पर टिकी हुई है। चीन अब अरूणाचल प्रदेश की वास्तिवक सीमा रेखा पर अपने सैनिकों का ठिकाना बना रहा है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के अस्फिला, टूटिंग, चांग ज, और फिशटेल-2 के विपरित चीनी क्षेत्र में चीनी गतविधियां देखी गई हैं। ये इलाके भारतीय सीमा से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर हैं। सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने मीडिया को ये जानकारी दी है। अनुमान है कि चीन की सेना भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश करे और किसी शांत और बिना आबादी वाली जगह को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करे।

वहीं सरकारी सूत्रों के मुताबिक चीनी के ऐसी किसी भी साजिश का जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से सतर्क सजग और मोर्चा लिए तैयार है। हालात को देखते हुए एलएसी पर सेना की तैनाती को भी बढ़ा दिया गया है। इससे पहले 5 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश से कांग्रेस विधायक निनॉन्ग एरिंग ने दावा किया था कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के पांच लोगों का कथित तौर पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अपहरण कर लिया गया है।

रिपोर्ट ये मुताबिक ये पांच लोग मछली पकड़ने के दौरान सीमा भटक गए थे। इस मामले को केंद्रीय मंत्री किरन रिजिूजू ने गंभीरता से केंद्र के सामने उठाया था। हालांकि, चीन की सीमा में चले गए पांच भारतीय नागरिक अब वतन लौट आए हैं। चीनी सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश के किबितू में इन पांचों नागरिकों को भारतीय सैनिकों को सौंप दिया है।

साल 2017 के बाद डोकलाम में पिछले 6 महीने से एक बार फिर से भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव की स्थिति बनी है। चीन की सेना यहां भूटान की सीमा में झाम्फिरी रिज तक सड़क निर्माण कर रही है। चीन की इस गुस्ताखी ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए खतरा पैदा कर दिया है।

लद्दाख में पहले से ही भारत और चीन के बीच पहले से ही तनाव है। यहां पर भारत ने चीन की कोशिशों को धत्ता बताते हुए पैंगोंग झील के पास काला टॉप और हेलमेट टॉप पर जैसी सामरिक चोटियों पर कब्जा कर लिया है।

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