भारतीय सेना और नौसेना में शामिल होगी निर्भय मिसाइल

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File Photo

नई दिल्ली: लद्दाख की एलसी सीमा पर भारत और चीन के बीच विवाद जारी है। भारतीय सेना किसी भी हालत में दुश्मन चीनी सेना को करार जवाब देने की तैयारी में जुटी हुई है। यही वजह है कि भारतीय सेना ने एलसी सीमा पर एक और मिसाइल तैनात कर ली है। इस मिसाइल का नाम निर्भय मिसाइल है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने औपचारिक तौर पर निर्भय को सेना में शामिल करने की मंजूरी दे दी है। हालांकि सेना ने नई मिसाइल को तैनात करने की औपचारिकता की प्रतीक्षा नहीं की और चीन के खिलाफ एलएसी पर कुछ की तैनाती पहले ही कर दी है।

निर्भय मिसाइल की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर है। यह मिसाइल जमीन से 100 मीटर से चार किमी के बीच उड़ान भरने में सक्षम है और उलझाने से पहले ही टारगेट का पता लगा लेती है। निर्भय मिसाइल सिर्फ जमीन से जमीन पर ही मार कर सकती है। इसका निर्माण रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है।

अगले माह इस मिसाइल का सातवां परीक्षण किया जाएगा, उसके बाद इसे सेना और नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। लेकिन इस बीच सेना ने चीन के साथ तनाव की स्थिति को देखते हुए ठीक ठाक संख्य में इस मिसाइल को एलसी पर तैनात कर दिया है। 0.7 मैक की गति से यात्रा करने वाली इस मिसाइल में टेरेन हगिंग और सी-स्किमिंग दोनों की क्षमता है, जिसके कारण इसका पता नहीं लगाया जा सकता और दुश्मन इसका जवाब नहीं दे पाता।

तिब्बत और झिंजियांग में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पश्चिमी थिएटर कमांड ने 2,000 किमी रेंज और लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को तैनात किया हुआ है। बुधवार को भारत ने ओडिशा में बालासोर स्थित एकीकृत प्रक्षेपण स्थल से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक नए संस्करण का सफल परीक्षण किया।

इसी मौके पर डीआरडीओ के अधिकारियों ने निर्भय मिसाइल की एलसी पर तैनाती की जानकारी दी। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि सतह से सतह पर मार करने वाली यह क्रूज मिसाइल स्वदेशी बूस्टर और ‘एअरफ्रेम’ के साथ भारत में निर्मित अन्य उप-प्रणालियों जैसी विशिष्टताओं से लैस है।

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