जानें कब है पौष पूर्णिमा, इस दिन मां दुर्गा के शाकंभरी स्वरूप की होती है पूजा

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कोलकाता डेस्कः हिन्दू धर्म में पौष पूर्णिमा का खास महत्व होता है। इस दिन चंद्रमा अपने पूरे आकार में होता है। इस दिन स्नान, दान का काफी महत्व होता है। इस साल 28 जनवरी को पौष पूर्णिमा मनाई जायेगी। इस साल पूर्णिमा पर गुरुपुष्य योग बनने पर इसका महत्व और बढ़ गया है।

शुभ मुहूर्त- पूर्णिमा तिथि 27 जनवरी, बुधवार की रात में 12:32 बजे से शुरू हो जाएगी जो 28 जनवरी को रात 12:32 बजे तक रहेगी। इसलिए गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही स्नान दान शुरू हो जायेगा।

इस दिन क्या करेंः पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा सुननी चाहिए। घर के प्रवेश द्वार पर आम के पत्तों की तोरण बांधनी चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस दिन ब्रह्यचर्य का पालन करना चाहिए। पूर्णिमा के दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। कहते हैं कि पीपल में मां लक्ष्मी का वास होता है।

पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन लहसुन, प्याज, मांस-मछली और शराब का सेवन नहीं करना चाहिये। पूर्णिमा के दिन चावल का दान करना शुभ होता है। चावल का संबंध चंद्रमा से होता है और पूर्णिमा के दिन चावल का दान करने से चंद्रमा की स्थिति कुंडली में मजबूत होती है।

पौष पूर्णिमा को शांकभरी पूर्णिमा भी कहते हैं। कहा जाता है कि पौष मास की पूर्णिमा के दिन ही मां दुर्गा ने अपने भक्तों के कल्याण के लिए माता शांकभरी का अवतार लिया था। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां दुर्गा ने पृथ्वी पर अकाल और गंभीर खाद्य संकट से भक्तों को निजात दिलाने के लिए शांकभरी का रूप लिया था।

इसलिए इन्हें सब्जियों और फलों की देवी माना जाता है। इसलिए इस पूर्णिमा को शांकभरी पू्र्णिमा के नाम से भी जानते हैं। पौष पूर्णिमा के दिन मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी इस दिन को छेरता पर्व मनाते हैं।

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