भारत एलएसी सीमा पर जल्द ही तैनात करेगा 10 हजार सैनिक

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File Photo

नई दिल्लीः भारत ने अब चीन से निपटने के लिये पूरी तरह से कमर कस ली है। पूर्वोत्तर राज्यों के इलाकों में भारत 10 हजार सैनिकों को तैनात करेगा। ये जवान रिर्जव डिविजन का हिस्सा रहेंगे जिन्हें कभी भी आसानी से एलएसी सीमा पर सुरक्षा कर रहे सैनिकों का सहयोग करने के लिये तैनात किया जा सकता है। साथ ही इन सैनिकों को कभी भी संवेदनशील इलाकों में आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिये कभी भी भेजा जा सकता है।

अपने एक बयान में आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 12 जनवरी को कहा था कि, भारतीय सेना केवल पूर्वी लद्दाख ही नहीं, बल्कि पूरी एलएसी पर उच्च स्तर की निगरानी रख रही है। सेना एलएसी पर किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। नरवणे ने कहा, जैसे-जैसे हमारा दर्जा और प्रभाव बढ़ता जायेगा, हमें ज्यादा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

भारत की उत्तरी सीमाओं पर बढ़ रही सुरक्षा चुनौतियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए आधुनिकीकरण के जरिए सेना की क्षमता निर्माण में बढ़ोतरी करना जरूरी है। भारत और चीन की सेनाओं के बीच बीते आठ महीने से ज्यादा समय से पूर्वी लद्दाख में गतिरोध चल रहा है।

मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों देशों की तुलना में तेजी से रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण करने के लिहाज से पिछड़ रहा था। उन्होंने देश की समग्र सैन्य क्षमताओं में बढ़ोतरी के लिए स्वदेशी उद्योग से अनुसंधान और विकास में निवेश करने का आह्वान किया।

साथ ही आर्मी प्रमुख नरवणे ने कहा, दूसरे देशों के उपकरणों पर सैन्य बलों की भारी निर्भरता को घटाना होगा और रक्षा क्षेत्र के लिए आज के समय की जरूरत के हिसाब से इसका समाधान करना होगा। घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में प्राइवेट उद्योगों को सरकार की सुधार पहल का फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी इसका पूरा समर्थन कर रही है।

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