नैहाटी में पटाखा निष्क्रिय करने के दौरान भीषण धमाका, टूटे खिड़कियों के शीशे, मची हाहाकार

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नैहाटीः फैक्ट्री से बरामद पटाखों को निष्क्रिय करने के दौरान नैहाटी के रामघाट में भीषण धमाका हो गया। धमाके के बाद दहशत इस कदर फैली कि गुस्साए स्थानीय लोगों ने पुलिस की दो गाड़ियों में आग लगा दी। स्थानीय लोगों ने प्रश्न उठाया कि पुलिस ने लोगों की जान को दाव पर रखते हुए इलाके में इस कदर पटाखा निष्क्रिय करने का निर्णय कैसे लिया। स्थानीय लोग पुलिस पर विभिन्न तरह के प्रश्न उठा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि गत 3 जनवरी को नैहाटी थाना क्षेत्र के देवक इलाके में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट होने से पांच लोगों की मौत हो गयी थी। जबकि घटना में कई लोगों के झुलस कर घायल हो जाने की खबर आई थी।

नैहाटी में 3 जनवरी की उस घटना के बाद पुलिस ने उक्त पटाखा फैक्ट्री में तलाशी अभियान चलाकर भारी मात्रा में पटाखा जब्त किया था। जब्त पटाखों को निष्क्रिय करने के लिए गुरुवार को पुलिस रामघाट गंगा के पास ले गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार पटाखे निष्क्रिय करने के दौरान ही भीषण धमाका हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि रामघाट के आस-पास स्थित कई मकान कांप उठे। धमाके के कारण मकान की खिड़कियों के शीशे और दरवाजे टूट गए। इतना ही नहीं रामघाट के दूसरी तरफ चुचुड़ा में भी कई घरों की खिड़कियों के शीशे टूट गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पटाखे निष्क्रिय करने वाले स्थान से पुलिस की गाड़ी करीब 100 से 150 मीटर की दूरी पर थी। धमाके के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूंट पड़ा। पुलिस के साथ स्थानीय लोगों की झड़प भी हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस की दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

खबर आई है कि घटना में दो पुलिस वाले बुरी तरह घायल हो गए हैं। घायल पुलिस जवानों को जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस का दावा है कि उन्हें समझ में नहीं आया कि जब्त पटाखे इतने शक्तिशाली थे। खबर आ रही है कि धमाके के दौरान जो पुलिस वाले घायल हुए हैं वह धमाके के कारण नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की पिटाई के कारण घायल हुए हैं। फिलहाल अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज चल रहा है।

गौरतलब हो कि 3 जनवरी को पटाखे की फैक्ट्री में हुए धमाके के बाद बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने दावा किया था कि उक्त कारखाने में कोई मामूली पटाखा नहीं बनाया जाता था बल्कि शक्तिशाली बम बनाये जाते थे। पुलिस की आंख में धूलझोंक कर अवैद रूप से कारखाने में बम बनाया जाता था।

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