घबराए नहीं, डाॅ. अग्रवाल के इन 11 प्वाइंट में समझें कोरोना और सामान्य फ्लू में फर्क

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दीपक राम
कोलकाताः कोरोना वायरस आज पूरी दुनिया में कहर बरपा रहा है। इस काल में खांसी और बुखार आते ही लोग दहशत में आ जा रहे हैं। इसकी वजह है कोरोना वायरस और सामान्य फ्लू के लक्षणों का आपस में मिलना। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों में फर्क कैसे किया जाए। क्या खांसी और बुखार आते ही आपको कोरोना की जांच करानी चाहिए? महानगर के रिकवरी नर्सिंगहोम के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुशील कुमार अग्रवाल के मुताबिक दोनों में काफी बारीक फर्क है। शुरूआती लक्षण काफी-कुछ मिलते-जुलते हैं, लेकिन पहचान करना संभव है।

डाॅ. अग्रवाल का कहना है कि मानसून की शुरुआत के साथ मौसमी बीमारियां भी बढने लगी है। जल जमाव की समस्या के कारण मलेरिया एव डेंगू बुखार का प्रकोप भी धीरे-धीरे बढने लगा है। इस मौसम में वायरस भी काफी सक्रिय हो जाते हैं जिसकी वजह से वायरल फीवर का प्रभाव प्रत्येक घरों में देखा जा सकता है।

बरसात एवं गर्मी के मौसम मे कुछ जलजनित रोग (water borne diseases) जैसे गैस्ट्रोएन्टेराइटिस, टाइफाइड बुखार जैसी बीमारियां भी अपना प्रभाव दिखाती है। अब सवाल ये है कि ये सब बीमारियां मलेरिया, डेंगू, वायरल, टाइफायड, गैस्ट्रोएन्टेराइटिस, निमोनिया, यूरीन इन्फेक्शन एवं कोरोना वायरस, सब में बुखार जरूर आता है। ऐसे में इस कोरोना काल में बुखार में कैसे फर्क करें। इस समय हम सबके लिए यह जानना बेहद जरूरी है।

1- डाॅक्टर सुशील अग्रवाल कहते हैं कि सबसे पहले तो दो से तीन दिन के बुखार में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए तुरंत अस्पताल या डॉक्टर के क्लिनिक में न जाएं। अपने फैमिली डॉक्टर से फोन पर सलाह लें। दिन में तीन बार करके पैरासिटामोल लें और बुखार के पैटर्न को चार घंटे के अंतर से नोट करें।

2- ठंड के साथ काफी तेज बुखार एक दिन छोड़ कर आता है तो दुनिया में मलेरिया के अलावा कोई दूसरा बुखार नहीं होता है। लेकिन ठंड के साथ दिन में दो-तीन बार तेज बुखार आता है तो फेलसिपेरम मलेरिया बुखार होने की संभावना होती है। अब सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में क्या करें। ऐसे में डाॅ. अग्रवाल बताते हैं कि निदान के लिए मलेरिया का ब्लड टेस्ट कराएं। इलाज में एन्टि मलेरिया की दवा लें।

3- डेंगू बुखार मे थोड़ी ठंड के साथ तेज बुखार और पूरे बदन में बहुत ज्यादा दर्द होता है। इसके साथ ही हड्डियों एवं जोड़ों में भी काफी दर्द होता है। सबसे ज्यादा आंखों के पिछले भाग में दर्द ( Retro orbital pain) होता है। इसके साथ ही शरीर में चकत्ते (Rashes) हो जाता है। ऐसी स्थिति में NS1 antigen टेस्ट और बार-बार प्लेटलेट टेस्ट करना चाहिए। इलाज के लिए symptomatic, पानी ज्यादा पीना ,प्लेट-लेट अगर दस हजार से कम हो तो platelet transfusion करना होगा।

4- केवल सुखी खांसी एवं छींक आती है तो Air pollution की संभावना होती है। इस दौरान इलाज में एन्टि एलर्जी की दवा लेनी होती है।

5- खांसी के साथ बलगम आना, छींक आना, और नाक बहना सामान्य cold या नार्मल सर्दी जुकाम होता है।
6- खांसी के साथ बलगम, छींक आना, नाक बहना, थोड़ी ठंड के साथ बुखार, शरीर मे दर्द एवं कमजोरी का होना फ्लू या वायरल फीवर हो सकता है। इसे कोरोना से फर्क करना चाहिए। इस स्थिति में इलाज के लिए पैरासिटामोल और एन्टि एलर्जी की दवा लेनी चाहिए।

7- सूखी खांसी, शरीर मे दर्द, कमजोरी, तेज बुखार ( 99’F to 101 ‘F), सांस लेने मे कठिनाई और पांच- छह दिन या उससे ज्यादा बुखार का बने रहना, स्वाद एवं सुगंध मे कमी का होना कोरोना संक्रमण का संकेत हो सकता है। निदान के लिए कोविड-19 RT PCR टेस्ट कराना होगा। इलाज के लिए पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन, जिन्क, विटामिन सी, मोन्टिल्यूकस एवं डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी।

8- कोरोना संक्रमित मरीज के सम्पर्क में आना, विदेश या देश में यात्रा किए हों, लेकिन कोई भी बीमारी के लक्षण न हो, ऐसे लोग asymptomatic पाॅजिटिव कहलाते हैं। इलाज के लिए ए सिम्पटोमेटिक पाॅजिटिव, हल्के लक्षण वाले मरीज के लिए 14 दिन आईसोलेशन, जिन्क विटामिन, विटामिन सी, हाइड्रॉक्सी क्विलोनिन, मोन्टिल्यूकस एवं बुखार होने पर पैरासिटामोल लेना जरूरी।

9- टाइफायड में बराबर बुखार बना रहता है। बेस लाइन को टच नहीं करता है। इलाज के लिए अपने डाॅक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

10- यूरीन इन्फेक्शन के कारण बुखार का होना। लक्षण यूरीन में जलन एवं बार-बार यूरीन जाना, इसके अलावा ठंड के साथ बुखार आता है। निदान के लिए यूरीन की जांच रूटीन एवं कल्चर। इलाज डॉक्टर की सलाह के अनुसार एन्टिवायोटिक।

11- निमोनिया भी एक बड़ी समस्या है। लक्षणों में सूखी या बलगम के साथ खांसी, हल्का या तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने मे दर्द या भारीपन, कमजोरी, बैचैनी, आक्सीजन का लेबल गिर जाना एवं मरीज की उम्र ज्यादा कोरोना संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार अस्पताल में भर्ती हों। घर मे रखना एवं घर में इलाज करना खतरे की बात हो सकती है।

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