आज के दिन भूलकर भी न करें ऐसे कार्य

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कोलकाता डेस्क: आज देवउठानी एकादशी और तुलसी विवाह है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। देव जागरण या उत्थान होने के कारण इसे देवोत्थान एकादशी भी कहते हैं। हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का बेहद महत्व है और इसे सबसे बड़ी एकादशी माना जाता है।

इसके साथ ही सारे शुभ मुहूर्त की शुरूआत हो जाती है। इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा से बाहर आते हैं और सृष्टि के पालनहार का दायित्व संभालते हैं। इस दिन भगवान विष्णु का शयनकाल समाप्त होता है। इस दिन व्रत का विशेष महत्व है। व्रति को निर्जला या सिर्फ जूस और फल पर ही व्रत रखना चाहिए।

इस दौरान तुलसी पूजा भी की जाती है। इस दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी का विवाह होता है।

देवउठनी एकादशी पर निर्जल या जलीय पदार्थों पर उपवास रखना फलदायी माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति बीमार या वृद्ध है तो वह एक वक्त फलाहार का सेवन कर सकता है। इस दिन भूलकर भी नमक और चावल का सेवन न करें। साथ ही प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा से दूरी बनाकर रखें।

इन चीजों का सेवन करने से भगवान विष्णु आपसे नाराज हो सकते हैं। इसलिए देवोउत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु की उपासना जरूर करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। भूल कर भी नहीं करनी चाहिए ऐसे लोगों को तुलसी पूजा जो मद्यपान करते हैं उन्हें तुलसी पूजा नहीं करना चाहिए भगवान विष्णु के भक्तों के लिए मद्यपान वर्जित होता है।

घर में शराब का सेवन करने वालों को तुलसी का पौधा नहीं रखना चाहिए। इससे लाभ की बजाय हानि होता है। तुलसी को हमेशा उत्तर दिशा में लगाना चाहिए। क्योंकि उत्तर बुध की दिशा मानी जाती है। जिस स्त्री का मासिक धर्म चल रहा है उसे तुलसी पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जब द्रोपदी को वस्त्र हरण हुआ तो उस समय उनका मासिक धर्म चल रहा था।

यही वजह है कि वे अपने कक्ष में ना रहकर दूसरे कक्ष में एक वस्त्र में रही थीं। तुलसी को एक पवित्र पौधा माना जाता है। इसे पतिव्रता स्त्री ही कर सकती है। जिस स्त्री का कई पुरुषों से संबंध होता है उन्हें भूल कर भी यह पूजा नहीं करनी चाहिए।

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