दिशारी हेल्थ प्वाइंट पर हेल्थ कमिशन का डंडा, लगाया 2 लाख रुपये जुर्माना

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File Photo

कोलकाताः एक नवाजात के मौत मामले में मालदा के दिशारी हेल्थ प्वाइंट पर वेस्ट बंगाल क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन का बड़ा डंडा चला है। हेल्थ कमिशन ने दिशारी हेल्थ प्वाइंट पर 2 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका है। दरअसल मामला साल 2019 अक्टूबर का है। मकबूल इस्लाम नामक 29 दिन के एक नवजात के पिता ने हेल्थ कमिशन में शिकायत दर्ज कराई थी।

वैक्सीन देने के बाद उनके 29 दिन के बेटे को कुछ समस्या हो रही थी। नवजात के एक छोटे ऑपरेशन के लिए मालदा के दिशारी हेल्थ प्वाइंट में भर्ती कराया गया था। नवजात के मां का दावा था कि उन्होंने अस्पताल को बार-बार कहा कि मात्र 29 दिन का बच्चा उनके बगैर नहीं रह सकता। बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद अस्पताल ने नवजात के साथ रहने की अनुमति नहीं दी।

इसके बाद 31 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे नवजात की मां उसे दूध पिलाकर बाहर चली आई। इसके बाद ही उसी रात ढाई बजे नवजात की मौत हो गई। अस्पताल की तरफ से नवजात के मौत का कारण एस्पिरेशन निमोनिया बताया गया।

हेल्थ कमिशन के चेयरमैन असीम बनर्जी ने बताया कि नवजात के गले में कुछ अटकने से मौत हुई। अब सवाल था कि 29 दिन के बच्चे की मौत गले में दूध अटकने से हुई? सवाल यह भी उठा कि माँ द्वारा रात 10 बजे दूध पिलाने के बाद 2.30 बजे फिर से बच्चे को दूध पिलाने कौन गया था? कमिशन के सामने यह बड़ा सवाल था।

विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि नवजात को दूध पिलाने के बाद ढेकार दिलाई जाती है। ऐसा ना करने से नवजात के दम घुटने की संभावना काफी होती है। कई बार बच्चे को दूध पिलाने के बाद तुरंत सुला दिया जाता है ऐसे में बच्चे के फेफड़े और सांसनली में दूध अटकने से दम घुट जाता है!

ऐसी भी घटनाएं हुई हैं जहां मां अपने बगल में बच्चे को लेकर सोई हो और उसके स्तनों से नवजात की नांक और मुंह ढक गया हो। ऐसे में सांस ना लेने के चलते नवजात की मौत तक हो जाती है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। चिकित्सकों का मानना है कि मालदा वाले केस में भी ऐसा ही कुछ हुआ है।

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