भारतीय इस्राइल सैन्य डील: 63 करोड़ डॉलर में आधुनिक होगी भारतीय नौसेना

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ज़ेरोजेलम: इस्राइल की सरकारी इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) ने कहा है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ संयुक्त रूप से किए गए 63 करोड़ डॉलर के समक्षौते के तहत इस्राइल भारतीय नौसेना के चार पोतों के लिए लंबी दूरी की आधुनिक वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति करेगा। समक्षौते की घोषणा ऐसे समय की गई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई माह में संभवत: इस्राइल के दौरे पर जा सकते हैं।

इस्राइल ने पिछले महीने अपना अब तक का सबसे बड़ा दो अरब डॉलर का सौदा किया था जिसके तहत वह भारतीय सेना और नौसेना को मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति करेगा। इस सौदे में 1.6 अरब डॉलर का सबसे बड़ा हिस्सा आईएआई का है। आईएआई ने कल कहा कि हाल का सौदा लांग रेंज सफेर्स टू एयर मिसाइल सिस्टम्स (एलआरएसएएम) की आपूर्ति से जुड़ा है। एलआरएसएएम का निमार्ण आईएआई और भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने संयुक्त रूप से किया है। यह प्रणाली विभिन्न तरह के हवाई, सामुद्रिक तथा वायुजनित खतरों से मजबूत संरक्षण देती है। भारतीय सेना भी जल्द ही इसकी तैनाती कर सकती है।

आईएआई की ओर से जारी वक्तव्य में बताया गया कि पिछले हफ्ते एलआरएसएएम का भारत में नौसेना के पोत पर सफल परीक्षण किया गया। यह इस किस्म का पहला ऐसा करार है जिसमें भारत सरकार के स्वामित्व वाला बीईएल मेक इन इंडिया नीति के तहत परियोजना का मुख्य ठेकेदार होगा। आईएआई के अध्यक्ष एवं सीईओ जोसफ वेईस ने कहा, इस नए समक्षौते के अलावा बीते एक दशक में आईएआई ने भारत के रक्षा बलों के साथ कई अन्य समक्षौते भी किए हैं जो वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली के क्षेत्र में आईएआई के वैश्विक नेतत्व की स्थिति को और मजबूती देते हैं।

भारत सरकार की कंपनी बीईएल को पहली बार शामिल करना मेक इन इंडिया नीति के तहत भारतीय उद्योग के साथ हमारे संबंधों की दिशा में बढ़ाया गया कदम है। उन्होंने कहा, यह अनूठी परियोजना भारत के डीआरडीओ, आईएआई और दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच नजदीकी संबंधों को रेखांकित करती है। हम इसे संयुक्त प्रयासों के जरिए क्रियान्वित करने की दिशा में बढ़ेंगे।