महिला आर्मी ऑफिसर चीन बॉर्डर पर पिता के नाम का पोस्ट देख रो पड़ी

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आशीष टॉप

कोलकाताः बच्चों के लिए वह समय सबसे गर्व वाला होता है जब वह अपने फौजी पिता की शौर्यगाथा दूसरे के मुंह से सुनते है। कुछ ऐसा ही हुआ महिला लेफ्टिनेंट के साथ भी। महिला लेफ्टिनेंट शैक्षणिक टूर पर तवांग सेक्टर के ख्यातो पोस्ट गई थी।

पोस्ट पर पहुंचने पर देखा वहां पर पोस्ट का नाम ‘आशीष टॉप’ लिखा है। जिसे पढ़कर महिला अफसर हैरान रह गई। अधिकारियों से नाम के बारे में पूछा तो पता चला कि आशीष कोई और नहीं बल्कि उनके पिता आशीष दास हैं। जिनके नाम पर यह पोस्ट रखा गया है।

आशीष दास असम रेजिमेंट में कर्नल के पद पर थे। मौजूदा समय में वह सेना से रिटायर कर चुके हैं। महिला लेफ्टिनेंट ने उसी पोस्ट से अपने पिता को फोन लगाया और पिता को जानकारी दी कि वहां एक पोस्ट उनके नाम की भी है।

आशीष दास ने बताया कि उनकी यूनिट ने साल 1986 में इस सेक्टर में अपनी अद्भुत वीरता का परिचय देते हुए चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को मात दी थी और 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित चोटी पर अपना कब्जा जमाया था।

1986 में अरुणाचल प्रदेश के सुमदोरोंग चू वैली में चीनी सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा के काफी अंदर तक पहुंच आई थी। चीनी सैनिकों ने वहां हेलिपैड और स्थायी निर्माण भी करना शुरू कर दिया था। भारतीय सेना को जब इसका पता चला तो जनरल के.सुंदरजी ने ऑपरेशन फॉल्कन शुरू की।

इस अभियान की जानकारी मीडिया तक नही पहुंचने दी गई थी। एयरलिफ्ट करके पूरी इंफ्रैंट्री ब्रिगेड को सुमदोरोंग चू वैली के निकट जिमिथांग पहुंचाया गया। तब सेना ने काफी दिन तक मोर्चा संभाले रखा था।

आशीष दास ने सेना की शौर्य गाथा में बताया कि उन्हें आदेश था कि मोर्चा संभाले रहें। हमारी यूनिट ने बूम ला से अपना रास्ता बनाना था और सांगेत्सर झील पहुंचना था क्योंकि चीनी सैनिक झील के पार बैठे थे। यूनिट ने धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू किया। बर्फ काफी पड़ी हुई थी और ख्यातो भी पूरा तरफ बर्फ से ढका हुआ था। ऐसे में किसी को पता ही नहीं चला कि भारतीय सेना चीनी शिविर को पार कर गए हैं। राशन भी खत्म हो गया था, हवाई मार्ग से राशन देने का प्रयास किया था लेकिन वह राशन चीनी सीमा में जा गिरा। ऐसे स्थिती में जिंदा रहने के लिए सबने चूहों को पकड़ कर खाया था।

उस दौरान दोनों तरफ से भीषण गोलाबारी हुई। भारतीय जवान तीन दिनों तक भूखे रहे लेकिन मोर्चा संभाले रखा।

2003 को उन्हें पता चला कि उनके शौर्य को समर्पित उनके नाम पर पोस्ट का नाम ‘आशीष टॉप’ रखा गया है। अब बेटी को जब इसकी जानकारी हुई तो वह इस सम्मान को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाई।

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