हिंसा नियंत्रण को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सराहा

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कोलकाताः चुनाव के बाद राज्य में हिंसा नियंत्रण को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सराहा है। ऐसे में केंद्र को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कलकत्ता उच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने राज्य में चुनाव के बाद की हिंसा की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में विशेष जांच दल या एसआईटी बनाने के एक आवेदन को भी खारिज कर दिया।

पांच न्यायाधीशों वाली पीठ ने कहा कि राज्य में इस समय स्थिति सामान्य है। राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने में अपनी उचित भूमिका निभाई है। इसलिए एसआईटी बनाने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने एक हलफनामे में कहा कि किसी भी हिंसा के मामले में तत्काल कार्रवाई की गई है।

पिछले 7 दिनों से राज्य में चुनाव के बाद हिंसा या जनहानि नहीं हुई है। सभी घटनाओं की जांच आपातकालीन आधार पर की गई है। फिलहाल राज्य में कोई हिंसा नहीं हुई है। हालांकि, मामला करने वाले वकीलों ने इस हलफनामे में राज्य के दावे का विरोध किया है। नतीजतन, पांच-न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठ ने अगले सोमवार तक फिर से हलफनामा देने के लिए कहा है। मामले में अगली सुनवाई अगले मंगलवार को है।

कोर्ट ने राज्य में चुनाव के बाद की हिंसा के मद्देनजर राज्य सरकार की प्रशंसा की है। ऐसे में समझा जा रहा है कि राज्य सरकार ने हिंसा को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि राज्यपाल जगदीप धनखड़ चुनाव के बाद हुई हिंसा को लेकर राज्य सरकार की लगातार कठोर आलोचना कर रहे हैं। 5 मई को, जब ममता बनर्जी ने तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो उन्होंने उन्हें चुनाव के बाद की हिंसा के लिए अपनी जिम्मेदारी की याद दिलाई।

वहीं सोमवार को भी राज्यपाल ने कहा कि हमें हर ओर से फोन आ रहे हैं। हमने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ राज्य सरकार को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। हमें राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। 3 जनवरी को हमने हिंसा को लेकर राज्य के डीजीपी और सीपी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन नहीं मिली।

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