बी.पी.पोद्दारः इलाज के नाम बनाया लाखों का बिल, हेल्थ कमिशन ने दिया लौटाने का निर्देश

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कोलकाताः राज्य में प्राइवेट अस्पतालों की लूट का सिलसिला जारी है। कोरोना से पीड़ित मरीजों को मोटा बिल थमाया जा रहा है। जिसकी लगातार वेस्ट बंगाल क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन में शिकायत दर्ज हो रही है। हावड़ा निवासी आशा पोद्दार की कोरोना टेस्ट जब पॉजिटिव आई तो 11 जुलाई को उन्हें बी.पी.पोद्दार अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

19 जुलाई तक मरीज भर्ती थी। अस्पताल ने इन्हें 3 लाख 50 हजार रुपये का बिल थमा दिया। परिजनों ने जब इलाज में हुए खर्च का पूरा ब्योरा मांगा तो अस्पताल की तरफ से कुछ नहीं दिया गया। जिसके बाद परिजनों ने वेस्ट बंगाल क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन में ओवर बिलिंग की शिकायत दर्ज कराई थी।

इस मामले की सुनवाई पूरा होने पर शुक्रवार को हेल्थ कमिशन ने अपना फैसला सुनाया। इस मामले में हेल्थ कमिशन ने बी.पी. पोद्दार अस्पताल को दोषी पाया है। कमिशन के चेयरमैन असीम कुमार बनर्जी (अवकाश प्राप्त) ने कहा पिछले करीब एक महीने से यह केस हम देख रहे थे। अस्पताल के खिलाफ शिकायत थी कोरोना इलाज के लिए 9 दिन में अस्पताल ने 3 लाख 50 हजार रुपये का बिल बनाया। जबकि बिल का कोई कागजात नहीं दिया गया।

असीम कुमार बनर्जी ने कहा कि मामले की सुनवाई करते हुए हमने अस्पताल से बिल की मांग की थी। लेकिन वे बिल नहीं दे सके। अस्पताल की तरफ से कहा गया कि मरीज के इलाज से जुड़े कोई कागजात उन्हें नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में मरीज की तरफ से की गई शिकायत को सही माना गया है। अस्पताल को दोषी पाते हुए हेल्थ कमिशन ने 1 लाख 70 हजार रुपये लौटाने का निर्देश दिया है। अस्पताल यह राशि एक महीने के अंदर लौटाने को राजी हुआ है।

वहीं बी.पी.पोद्दार अस्पताल के खिलाफ दर्ज एक अन्य मामले में भी शुक्रवार को कमिशन ने अपना फैसला सुनाया। दरअसल एस. राय मजूमदार नामक एक व्यक्ति ने ओवर बिलिंग को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। 28901 रुपये का बिल हुआ था। जिसमें पीपीई चार्ज को लेकर शिकायत थी। इस मामले को लेकर अस्पताल की तरफ से कहा गया कि पीपीई चार्ज के लिए सरकारी सर्कुलर आने के पहले की यह घटना थी। ऐसे में हेल्थ कमिशन ने अस्पताल को 14 हजार रुपये लौटाने का निर्देश दिया है।

आर.एन टैगोर को हेल्थ कमिशन की कड़ी चेतावनी
आरएन टैगोर अस्पताल के खिलाफ दर्ज एक मामले की सुनवाई करते हुए हेल्थ कमिशन ने अस्पताल को कड़ी चेतावनी दी है। दरअसल महानगर के कसबा निवासी अजय कुमार दास पिछले कई वर्षों से आरएन टैगोर में हेल्थ चेकअप कराते आ रहे हैं। इस बार भी 4 अगस्त 2020 को वह हेल्थ चेकअप के लिए अस्पताल पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अपना पीएएस टेस्ट कराया था। इसके लिए आरएन टैगोर ने कुल 1700 रुपये लिये थे।

टेस्ट की रिपोर्ट जब उन्हें मिली तो उनके होश उड़ गए। दरअसल जो रिपोर्ट उन्हें मिली थी वह लाल पैथ लैब की थी। जांच का जो चार्ज था वह 750 रुपये था। जबकि आरएन टैगोर ने 1700 रुपये लिए थे। जिसके बाद उन्होंने अस्पताल से प्रश्न किया उन्होंने तो आरएन टैगोर में जांच कराई तो रिपोर्ट लाल पैथ की क्यों दी जा रही है? जिसके जबाव में अस्पताल ने मशीन खराब होने का हवाला दिया। ऐसे में उन्होंने हेल्थ कमिशन में शिकायत दर्ज कराई थी।

हेल्थ कमिशन ने चेयरमैन असीम कुमार बनर्जी ने कहा कि इस मामले की जब हमने जांच की और अस्पताल से जबाव मांगा तो मशीन खराब होने का हवाला दिया गया। लेकिन सवाल यह था कि उक्त जांच का चार्ज 750 रुपये (लाल पैथ के मुताबिक) तो 1700 रुपये क्यों लिए गए?

इसका जबाव अस्पताल के पास नहीं था। ऐसे में हेल्थ कमिशन ने 1700 रुपये लौटाने के साथ 5 हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माना लगया है। इसके साथ ही अस्पताल को कड़ी चेतावनी दी है कि आगे से यह ध्यान रखें कि वे अन्य पैथ लैब की तुलना में कितना चार्ज कर रहे हैं।

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