इशरत जहां केस: जांच से पहले गवाहों को रटाए जा रहे जवाब

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नई दिल्ली: इशरत जहां मामले में जांच कर रही समिति के हेड बीके प्रसाद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है. ‘आज तक’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि मामले की जांच के दौरान जिस किसी को फोन करते थे तो लोग डर जाते थे कि उनसे क्या पूछताछ होगी? वो डरे नहीं इसलिए मैंने अधिकारी को कहा कि ‘आपने उस समय फाइल देखी है, अगर नहीं देखा तो बता देना और अगर देखा तो भी बता देना.’

बता दें कि एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीके प्रसाद ने जांच से पहले ही गवाहों को सवाल तो बताए ही साथ ही उसके जवाब में क्या कहना है यह भी बताया.

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इशरत जहां मुठभेड़ से जुड़ी फाइलें गुम होने की जांच के लिए बनी समिति के मुखिया ने गवाहों को पहले ही जवाब रटवा दिए थे. गवाहों को यह भी बता दिया गया कि उनसे क्या सवाल किए जाएंगे. जांच समिति के हेड बीके प्रसाद ने गवाह से कहा कि ‘मेरे को ये पूछना है कि आपने ये पेपर देखा? आपको कहना है कि मैंने ये पेपर नहीं देखा…सीधी सी बात है.’

‘द इंडियन एकस्प्रेस’ की खबर के मुताबिक एडिशनल सेक्रेटरी होम बीके प्रसाद ने यह मामले के गवाह और गृहमंत्रालय के पूर्व निदेशक अशोक कुमार से यह कहा है. समिति के हेड की गवाहों को दी गई इस कोचिंग ने जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. बता दें कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बीती 10 मार्च को लोकसभा में इशरत जहां से जुड़ी फाइलों के गुम होने की जांच के लिए समिति बनाई थी. बीके प्रसाद ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

रिपोर्ट छापने वाले अखबार के मुताबिक 25 अप्रैल को दोपहर करीब 3.45 बजे रिपोर्टर ने प्रसाद को फोन किया. हालांकि रिपोर्टर ने यह पूछने के लिए कॉल किया था कि चीन के उईगुर समुदाय के एक्टिविस्ट डोल्कुन इसा को ई-टूरिस्ट वीजा क्यों नहीं दिया गया? प्रसाद का जवाब रिपोर्टर ने रिकॉर्ड किया. इसी दौरान प्रसाद को दूसरा फोन आया और उन्होंने रिपोर्टर को होल्ड कर दूसरे फोन पर बात करनी शुरू कर दी. वे फोन पर इशरत जहां से जुड़ी फाइलों के गुम होने की जांच से संबंधित बात कर रहे थे. यह बातचीत भी रिपोर्टर के फोन में रिकॉर्ड हो गई. जहां प्रसाद एक ऑफिसर से बात कर रहे थे जिसे अगले दिन अपना बयान दर्ज करना था.

इस पर बीके प्रसाद ने कहा कि ‘अगर हम कुछ सीक्रेट बात कर रहे होते तो पहले हम रिपोर्टर का फोन काट देते. हमने रिपोर्टर का फोन नहीं काटा.’