गीता ज़ोहरी, गुजरात की पहली महिला पुलिस महानिदेशक

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नई दिल्ली: गुजरात की पहली महिला आईपीएस अधिकारी गीता जोहरी को मंगलवार को डीजीपी बना दिया गया, वह पहली महिला हैं जो गुजरात राज्य की पुलिस महानिदेशक नियुक्त हुई हैं।
इससे पहले 16 अप्रैल, 2015 को, CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में उनके

खिलाफ आरोप हटाए जाने के बाद, गीता जोहारी को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद से पुलिस महानिदेशक के पद पर प्रमोट किया गया था पर पूर्व महानिदेशक पी पी पांडे की सेवा मे विस्तार की वजह से उन्हे पदभार नही मिल पा रहा था।

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जोहरी वर्तमान में गांधीनगर में गुजरात स्टेट पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थी। उन्होंने कुछ समय के लिए वडोदरा में पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय के प्राचार्य के रूप में भी काम किया। 1982 बैच के ये आईपीएस अधिकारी पहली बार तब नज़र मे आई जब इन्होने 1990 के दशक में गुजरात के अंडरवर्ल्ड किंग अब्दुल लतीफ को दारापुर जिले में स्थित घर पर छापा मारा और अब्दुल लतीफ के बंदूकधारक शरीफ खान को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि लतीफ वहाँ से बचने मे कामयाब रहा।

2006 में, जोहरी, जो कि आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) में तैनात थी, ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ में जांच की और उसकी पत्नी कौसर बी की हत्या के केस का नेतृत्व किया। सोहराबुद्दीन के भाई रुबबुद्दीन ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की, जिसके बाद उन्हें इस मामले में नियुक्त किया गया।

जोहरी ने सबूत इकट्ठे किए जिन्होने इस बात को साबित किया कि मुठभेड़ ‘नकली’ थी और इस नकली मुठभेड़ मे कई अधिकारियों को फँसाया गया था। इन्होने पूर्व पुलिस पुलिस महानिदेशक डीजी वंजारा, एसपी राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन सहित 13 पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए साक्ष्यों का नेतृत्व किया।

मई 2007 में, जोहरी की जांच से पता चला कि पुलिसकर्मियों ने सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी की हत्या कर दी क्योंकि वे पदोन्नति और पुरस्कार चाहते थे। अंत में, वह यह साबित करने में कामयाब रही कि यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है।

इसी वर्ष सीबीआई ने गीता जोहरी को महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट करने के आरोपों पर समन जारी किया।